HEALTH


अक्सर गर्म मौसम में तैलीय त्वचा वाले युवाओं को पीड़ाजनक एक्ने का अनचाहा सामना करना पड़ता है। बार-बार की सावधानियां भी इस तकलीफ को रोक नहीं पाती और पी‍ड‍ित झुंझला उठता है। कई बार सही जानकारी का अभाव भी एक्ने का जनक हो सकता है। आप यही उदाहरण देख लीजिए : 

18 वर्षीय एक युवती के माथे पर अचानक छोटे-छोटे दाने उभर आए। बालों में कई समय से रूसी होने के कारण ये दाने हो गए थे। सौंदर्य समस्याएं कई बार सेहत से जुड़ी होती हैं। जैसा इस युवती के मामले में हुआ। दानों के उपचार के लिए उसकी त्वचा और बालों की रूसी का उपचार साथ-साथ किया, हेयर स्टाइल बदली ताकि बाल माथे पर न आएं। उसे रोज बालों को धोने की सलाह दी गई। साथ ही रूसी का उपचार भी शुरू किया गया। 

हाजमा ठीक न होने से भी इस तरह की परेशानी हो सकती है। उसे रोज दिन में एक कटोरी दही खाने की सलाह दी गई। तीन महीनों के बाद उसके माथे के दाने गायब हो गए। माथे के दाने कई बार साधारण न होकर किसी संक्रमण के कारण हो सकते हैं। 
हाजमा बिगड़ना भी एक कारण हो सकता है, इसके लिए भरपूर पानी पीना बहुत जरूरी है। माथे की त्वचा चेहरे की बाकी त्वचा से थोड़ी अलग होती है, वहां तेल ग्रंथियां ज्यादा होती हैं, इसलिए दाने भी सबसे पहले उभरते हैं। 

इसी तरह अगर लिवर इंफेक्शन होने पर भी माथे पर दाने आ सकते हैं। हालांकि ऐसा हर बार हो ही, ऐसा जरूरी नहीं। साफ-सफाई बहुत ही महत्वपूर्ण है। अपने हाथों को दिन में कई बार साबुन से धोएं। 

चेहरे को सेलिसिलिक एसिड युक्त फेस वॉश से दिन में दो बार धोएं। बालों को छोटा रखें। अगर लंबे हों तो उन्हें पीछे की ओर बांधे। ध्यान रखें कि वे चेहरे पर न आने पाएं। 


अपने हाथों को चेहरे पर कम से कम लगाएं। 

हेड बैंड्स का प्रयोग न करें, क्योंकि वे पसीना सोखते हैं। 

धूम्रपान कम करें। एक्टिव स्मोकर्स में एक्ने ज्यादा होता है। 

हेयर स्प्रे बहुत सावधानी से करें क्योंकि इससे रोम छिद्र बंद हो सकते हैं। बालों को बांध कर रखें। 

ध्यान दें कि बालों से शैंपू पूरी तरह साफ हो। बालों और माथे पर शैंपू के अंश रह जाने से कई तरह की परेशानियां हो सकती हैं। 

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अपने कॉफी के दीवाने साथी को अपने प्रति आकर्षित करने के लिए इन कॉफी फेस पैक का प्रयोग करें। 

ह बनाने में आसान तो हैं ही और अमूमन कॉफी हर किसी के घर में उपलब्ध हो जाती है!

हनी-कॉफी पैक :

हमें कॉफी और शहद बहुत पसंद हैं! और दोनों को मिलाने पर सोचिए हमें कितना लाजवाब पेस्ट मिलेगा। खूबसूरत, नरम त्वचा पाने के लिए प्रत्येक की 1-1 चम्मच मिलाएं और अपने चेहरे पर लगा लें। सूखने के बाद इसे धो लें।
कोको-कॉफी पैक :
इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता है! यदि इस कॉम्बो के बारे में सोचकर आपके मुंह में पानी आ रहा है तो सोचिए ये आपके चेहरे के लिए क्या कर सकते हैं! कोको और कॉफी दोनों एंटीऑक्सीडेंट होते हैं और थोड़ा-सा शहद (एक और एंटीऑक्सीडेंट) का उपयोग करके यह पेस्ट लगाकर आप अपनी त्वचा को पोषण देने के साथ-साथ आप पूरे दिन की जमा गंदगी भी साफ कर सकेंगे...


सूखी त्वचा के लिए पैक :

कॉफी पाउडर के साथ जरा-से जैतून के तेल का मिश्रण करके आपको सूखी त्वचा के लिए एक उपयोगी उपाय मिल जाएगा। बस इस पेस्ट को अपने चेहरे पर लगा लें। पैक को सूखने न दें, गीला रहे तब ही इसे धो लें।










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कैंसर  के बारे में 
विश्वभर में कैंसर एक ऐसी बीमारी है, जिसमें सबसे ज्यादा लोगों की मौत होती है। आज विश्वभर में सबसे ज्यादा मरीज इसकी चपेट में हैं। इसी कारण विश्व स्वास्थ्य संगठन ने हर साल 4 फरवरी को विश्व कैंसर दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया, ताकि इस भयावह बीमारी के प्रति लोगों में जागरूकता आए।

कैंसर एक ऐसी भयावह बीमारी, जिसकी चपेट में हर साल आकर हजारों लोग मौत की दहलीज पर खड़े हैं। हमारा मकसद कैंसर की बीमारी का नफा-नुकसान बताना नहीं बल्कि लोगों को इसके प्रति जागरूक करना है ताकि कोई दूसरा व्यक्ति इस बीमारी से प्रभावित न हो। 

हम सभी के दिल और दिमाग में यह बीमारी मृत्यु के पर्यायवाची के रूप में अंकित हो गई है। अज्ञानता के कारण हम इस बीमारी को सही स्टेज पर नहीं पहचान पाते, जिस कारण मरीज को बचाना मुश्किल हो जाता है। यह इतनी भयावह नहीं, जितना हम मानते हैं।

कैंसर होने के मुख्य कारण : - 

* उम्र का ब़ढ़ना
* किसी भी प्रकार का इरिटेशन
* तम्बाकू का सेवन
* विकिरणों का प्रभाव
* आनुवांशिकता
* शराब का सेवन
* इन्फेक्शन
* मोटापा



डब्ल्यूएचओ द्वारा तय किए लक्षण :- 

विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्ल्यूएचओ ने इस बीमारी को भयावह माना है और बताया है कि इन लक्षणों से इसे पहचाना जा सकता है।

* लंबे समय तक गले में खराश होना। 

* लगातार खांसी आना। 

* आहार निगलने में रुकाव होना। 

* शरीर में गठान पड़ना। 

* कहीं से भी पानी या रक्त बहाव होना। 

* त्वचा में मस्सा या तिल में तात्कालिक परिवर्तन। 

* आवाज बदल जाना। 

* वजन में गिरावट होना। 

* बुखार आना। 

कोशिकाओं का अनियंत्रित विभाजन ही कैंसर : - 

कैंसर को समझने के लिए सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि इसके होने का कारण क्या है...? 

लक्ष्मी नारायण हॉस्पिटल एण्ड कैंसर केयर के कैंसर विशेषज्ञ डॉ. आशीष गुप्ता कहते हैं कि हमारा शरीर असंख्य कोशिकाओं से बना है। यह कोशिकाएं आवश्यकता अनुरूप अत्यंत ही नियंत्रित प्रणाली के द्वारा विभाजित होती हैं और जब आवश्यकता नहीं होती है, तब यह विभाजित नहीं होतीं। 

इन्हीं कोशिकाओं में कभी आनुवांशिक बदलाव आने से इनकी नियंत्रित विभाजन प्रणाली पूर्णरूप से खत्म हो जाती है और फिर हमारी कोशिकाएं असामान्य रूप से विभाजित होने लगती हैं। कोशिकाओं के इस अनियंत्रित विभाजन को हम कैंसर कहते हैं।
रक्त की धमनियों से पहुंचता अंगों में : - 

कैंसर शुरुआती अवस्था में अपने प्राथमिक अंग में रहता है, धीरे-धीरे यह रक्त की धमनियों के द्वारा बहकर दूसरे अंगों में फैल जाता है। इस प्रक्रिया को मटास्टेसिस कहते हैं। यह बीमारी इसी कारण होती है। 

दरअसल, कैंसर का फैलाव चार चरणों में होता है। पहली स्टेज में कैंसर शुरुआती अवस्था में अपने प्राथमिक अंग में सीमित रहता है और अंतिम चरण में यह बीमारी शरीर के दूसरे अंगों में फैल जाती है


मेरी आपसे प्रार्थना  है कि अगर आप गुटका ,तम्बाकू ,सीग्रेट आदि का इस्तेमाल कर रहें है तो  आज ही से बंद  क्योकि इसके सेवन से आप भी अपनी अनमोल जिंदगी खो सकते है !अगर आप मेरी प्रार्थना को स्वीकार करके एक अच्छा इंसान बनेंगे तो मैं अपना प्रयाश सार्थक समझूंगा !अगर आप को मेरा सुझाव अच्छा लगे तो  जरूर मेल कीजिये 


यूँ रहें स्वस्थ
प्रेम में सचमुच दिल टूट जाता है!
अक्सर यह माना जाता है कि युवावस्था में असफल प्रेमियों का दिल टूट जाता है और वक्त से साथ टूटे हुए दिल की मरम्मत भी हो जाती है। प्रेम असफल होने का सबसे गहरा असर व्यक्ति की मानसिकता पर पड़ता है। असफलता इस व्यक्ति को मनोवैज्ञानिक तौर पर अपंग करती है। प्रेम में असफल व्यक्ति अपने आपसे हारने लगता है। खुद को दूसरों से कमतर आंकने लगता है। हाल ही में हुए शोधों से जाहिर हुआ है कि गहरे सदमे, अकेले पन के एहसास और किसी को खोने के एहसास के दिल की सेहत पर बुरा असर पड़ता है।
सावधान! ज्यादा बैठे रहने से होती हैं ये बीमारियां...
लम्बे समय तक बैठने से भी हमारे शरीर में कुछ ऐसे परिवर्तन होने लगते हैं जो कि हानिकारक होते हैं। भले ही हम इन पर गौर न कर पाते हैं। उदाहरण के लिए अगर हम टीवी के सामने लम्बे समय तक बैठे रहते हैं तो यह भी हानिकारक है और इससे व्यक्ति कई तरह बीमारियों का शिकार हो सकता है।
'किस' से होते हैं कैसे-कैसे इलाज
  
आप शीर्षक पढ़कर चौंक गए होंगे कि भला 'किस' से कैसे किसी बीमारी का इलाज हो सकता है? इसमें चौंकने की कोई बात नहीं है। डॉक्टरों व वैज्ञानिकों ने शोध करके यह पता लगाया है कि सेक्स अनेक रोगों की दवा भी है। जहां जीवन में सेक्स एक-दूजे के बीच सुख, आनंद, अपनापन लाता है, वहीं एक-दूजे की हेल्थ व ब्यूटी को भी बनाए रखता है।
'ॐ' धर्म का नहीं सेहत का भी मंत्र है
'ॐ' धर्म का नहीं सेहत का भी मंत्र है
'ॐ' किसी धर्म से जुड़ा न होकर ध्वनिमूलक है। माना जाता है कि सृष्टि के आरंभ में केवल यही एक ध्वनि ब्रह्मांड में गूंजती थी। जब हम 'ॐ' बोलते हैं, तो वस्तुतः हम तीन वर्णों का उच्चारण करते हैं: 'ओ', 'उ' तथा 'म'। 'ओ' मस्तिष्क से, 'उ' हृदय से तथा 'म' नाभि (जीवन) से जुड़ा है।
बिदा लेती ठंड के लिए टिप्स
जाती हुई ठंड में बहुत ज्यादा गर्म पानी और ठंडे पानी से न नहाएं बल्कि गुनगुने पानी का ही इस्तेमाल करें। ज्यादा गर्म पानी आपकी त्वचा को हानि पहुंचा सकता है।
डिप्रेशन से हर हाल में बचें
डिप्रेशन से हर हाल में बचें
डिप्रेशन या मनो अवसाद आधुनिक समाज में एक बहुप्रचलित मानसिक रोग की श्रेणी में आता है। संभवतः समय के साथ बढ़ते घरेलू विवाद, आपसी मतभेद, कार्य की व्यस्तता, दूसरों से आगे निकलने की होड़, अपने मनोनुकूल कार्य का न होना, दफ्तर में अपने से ऊपर बैठे अधिकारी द्वारा तिरस्कृत किया जाना,
गले के रोग जानलेवा भी हो सकते हैं
गले के रोग जानलेवा भी हो सकते हैं
हम में से बहुतों को खासकर बच्चों को अक्सर सर्दी-खांसी होती रहती है। यह बहुत ही साधारण बीमारी होती है व कुछ दिन रहकर ठीक हो जाती है। यह एक सामान्य बात है, परंतु इसके दूरगामी परिणाम भयावह होते हैं। होता गले का इंफेक्शन है, परंतु हृदय के वाल्व तथा किडनी (गुर्दे) इसके शिकार हो सकते हैं।
मजबूत कीजिए इम्यून सिस्टम को
मजबूत कीजिए इम्यून सिस्टम को
   
शरीर लगातार विभिन्न प्रकार की बीमारियों के वाहक जीवाणुओं के हमले झेलता रहता है। ये हमले नाकाम तभी हो सकते हैं जब हमारे शरीर का किला यानी हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत हो। इस किले को मजबूत करना कोई ज्यादा मुश्किल नहीं है। आइए देखते हैं कैसे :
शंख की आवाज से रोग भी भाग जाते हैं
शंख की आवाज से रोग भी भाग जाते हैं
अगर आपको खांसी, दमा, पीलिया, ब्लडप्रेशर या दिल से संबंधित मामूली से लेकर गंभीर बीमारी है तो इससे छुटकारा पाने का एक सरल-सा उपाय है - शंख बजाइए और रोगों से छुटकारा पाइए।
पार्टी के बाद अब करें खुद की सफाई
पार्टी के बाद अब करें खुद की सफाई
  
नए साल के बाद तक चलती रहने वाली पार्टियों का सीजन अब खत्म हो रहा है। लंबे समय तक मेकअप में रहने, ड्रिंक्स सिगरेट के धुएं के बीच लगभग पूरी-पूरी रात बिताने के बाद शरीर की ओर भी ध्यान देने की जरूरत है। अब वक्त है शरीर से विषैले तत्वों के निकाल बाहर करने यानी डिटॉक्स करने का। विषैले
संडे हो या मंडे, रोज खाओ अंडे
संडे हो या मंडे, रोज खाओ अंडे
 
नियमित रूप से एक अंडा खाने से न केवल दिनभर स्फूर्तिवान रहा जा सकता है बल्कि इससे कुपोषण की समस्या का समाधान भी किया जा सकता है।
मीठी चुस्की, तनाव की छुट्टी
मीठी चुस्की, तनाव की छुट्टी
एक शोध में पाया गया है कि मीठे पेय पदार्थ लोगों की आक्रामकता को कम कर देते हैं और उन्हें बहस में उलझने से बचाते हैं क्योंकि चीनी दिमाग को ऊर्जा प्रदान करती है जिसकी उसे आक्रोशित भावनाओं को नियंत्रण में रखने में जरूरत होती है। इससे लोग तनावपूर्ण हालात में दूसरों पर बरसने से परहेज करते हैं। 
चुकंदर : सर्दियों का प्राकृतिक टॉनिक
चुकंदर : सर्दियों का प्राकृतिक टॉनिक
  
हालांकि हमारे दैनिक आहार में चुकंदर को अभी भी उचित स्थान प्राप्त नहीं है, फिर भी इसे नियमित खाने से ना सिर्फ कई रोगों में लाभ होता है बल्कि यह त्वचा की खूबसूरती भी प्रदान करता है। इससे हिमोग्लोबिन बढ़ता है फलस्वरूप चेहरे की लालिमा बढ़ती है।
महक से पाएं चमकती त्वचा
महक से पाएं चमकती त्वचा
राजा-महाराजाओं के काल में केसर, गुलाब, केवड़ा, मोगरा, चमेली, चंदन तथा लोभान आदि सुगंध न सिर्फ मन को बहलाने के लिए इस्तेमाल किए जाते थे बल्कि इनके द्वारा रोगों का उपचार भी संभव था। इन्हीं प्राचीन उपचार पद्धतियों को आजकल फिर से अपनाया जा रहा है। प्रस्तुत है कुछ महत्त्वपूर्ण सुगंधित तेलों की उपयोगिता की जानकारी :
क्या आप जानते हैं सेहत के सुनहरे सूत्र
क्या आप जानते हैं सेहत के सुनहरे सूत्र
  
हर साल दिसंबर के जाते-जाते स्वास्थ्य को लेकर लिए गए संकल्पों का सिलसिला शुरू होता है, जो नववर्ष में एकाध महीना बीतने के साथ धुंधलाने भी लगता है। क्यों न ऐसा संकल्प लिया जाए, जो लचीला तो हो लेकिन जिसके लिए आपको अपने जीवन में कम बदलाव लाना पड़ें। जिन्हें अपनाना भी इतना आसान हो कि संकल्प आजीवन आपसे जुड़ा रहे।
हाई ब्लडप्रेशर : कारण और सावधानियां
हाई ब्लडप्रेशर : कारण और सावधानियां
अनियमित खानपान। कई बार आवश्यकता से अधिक खाना। मैदा से बने खाद्य पदार्थ, चीनी, मसाले, तेल, घी, अचार, मिठाइयां, मांस, चाय, सिगरेट व शराब आदि का सेवन। खाने में रेशे, कच्चे फल और सलाद न होना। शारीरिक श्रम न करना। पेट और पेशाब संबंधी पुरानी बीमारी। इन सब की वजह से होता है हाई ब्लड प्रेशर....
जानिए, क्या है तिलक का वैज्ञानिक आधार
जानिए, क्या है तिलक का वैज्ञानिक आधार
   
ललाट पर तिलक धारण करने से मस्तिष्क को शांति और शीतलता मिलती है तथा बीटाएंडोरफिन और सेराटोनिन नामक रसायनों का स्राव संतुलित मात्रा में होने लगता है।
माइग्रेन : एक जानलेवा दर्द
माइग्रेन : एक जानलेवा दर्द
 
मॉर्डन लाइफ स्टाइल अपना असर दिखाने लगी है। भागमभाग भरी जिंदगी, लेट नाइट स्लीपिंग, देर से उठना, असमय खाना और बढ़ते टेंशन आदि जैसे कई कारणों से माइग्रेन के युवा मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। सावधानी न रखने से यह गंभीर भी हो सकता है। अस्पतालों में प्रति माह 100 से अधिक युवा मरीज माइग्रेन के पहुंचते हैं।
सेहत के लिए खुद को रखें रिलैक्स्ड
सेहत के लिए खुद को रखें रिलैक्स्ड
अच्छी सेहत के लिए जरूरी है कि शरीर के साथ-साथ दिल और दिमाग को आरामदायक स्थिति में रखें। तीन बातें अपने जीवन में उतारें।
सावधान रहें 'ताजातरीन' सब्जियों से
सावधान रहें 'ताजातरीन' सब्जियों से
लोगों को अपने आहार में ताजा सब्जियों का इस्तेमाल करना चाहिए और ऐसी सब्जियों के सेवन से बचना चाहिए जो बहुत दिनों से संरक्षित कर रखी गई हों। ताजा सब्जियां जहां खाने में स्वादिष्ट और पौष्टिक होती हैं वहीं उनमें विटामिन काबोहाइड्रेट और प्रोटीन जैसे पोषक तत्व भी प्रचूर मात्रा में होते हैं ले‍किन सावधानी यह जरूरी है कि सब्जियां सचमुच ताजा हो न कि उन्हें इंजेक्शन से ताजा बनाया गया हो।
ताली पीटने से भाग जाते हैं रोग
ताली पीटने से भाग जाते हैं रोग
ताली बजाने के अनगिनत फायदे हैं। नियमित रूप से ताली बजा कर कीर्तन-भजन करने वालों पर 'भगवान' की कितनी कृपा होती है यह तो किसी को पता नहीं लेकिन मेरा विश्वास है कि निश्चित रूप से कई रोग उनके पास नहीं फटक पाते होंगे।
दर्द का अंत करे फेशियल रिफ्लेक्सोलॉजी
दर्द का अंत करे फेशियल रिफ्लेक्सोलॉजी
इस उपचार पद्धति के माध्यम से आपके शरीर के किसी हिस्से में दर्द का इलाज आपके ही चेहरे के किसी पाइंट पर दबाव बनाकर किया जाता है। फेशियल रिफ्लेक्सोलॉजी एक ऐसा इलाज है, जो उपचार की तीन प्राचीन पद्धतियों चायनीज मेरीडियन, चायनिज एनर्जी मेडिसीन और एक्यूपंक्चर पाईंट्स, वियतनामी और एंडीयन ट्राइब्स बॉडी मैप से प्रेरित है।
हिप्नोथैरेपी : आत्मविश्वास के लिए अचूक इलाज
हिप्नोथैरेपी : आत्मविश्वास के लिए अचूक इलाज
   
सम्मोहन व्यक्ति के मन की वह अवस्था है जिसमें उसका चेतन मन धीरे-धीरे तन्द्रा की अवस्था में चला जाता है और अर्धचेतन मन सम्मोहन की प्रक्रिया द्वारा निर्धारित कर दिया जाता है। साधारण नींद और सम्मोहन की नींद में अंतर होता है। साधारण नींद में हमारा चेतन मन अपने आप सो जाता है तथा अर्धचेतन मन जागृत हो जाता है।
नाभि स्पंदन : प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति
नाभि स्पंदन : प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति
यदि नाभि का स्पंदन ऊपर की तरफ चल रहा है याने छाती की तरफ तो अग्न्याशय खराब होने लगता है। इससे फेफड़ों पर गलत प्रभाव होता है। मधुमेह, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस जैसी बीमारियां होने लगती हैं। यदि यह स्पंदन नीचे की तरफ चली जाए तो पतले दस्त होने लगते हैं। बाईं ओर खिसकने से शीतलता की कमी होने लगती है, सर्दी-जुकाम, खांसी, कफजनित रोग जल्दी-जल्दी होते हैं।


सर्दियों में फिटनेस के स्मार्ट टिप्स
सर्दियों में फिटनेस के स्मार्ट टिप्स
फिट रहने के लिए शारीरिक कसरत जरूरी होती है। आमतौर पर देखा गया है कि लोग रूटीन कसरत इसलिए शुरू नहीं कर पाते हैं कि उनमें आवश्यक इच्छाशक्ति की कमी होती है। यही वजह है कि लोग पैदल चलने जैसी सामान्य कसरत भी शुरू नहीं करते और बेवजह मोटापे और बीमारी से घिरे रहते हैं। दरअसल सारा मसला शारीरिक कसरत से जुड़ा है। आप कुछ भी करें, चाहे तो खेलें या फिर जिम जाएं, शारीरिक क्रियाओं से आपकी इकट्ठा की हुई ऊर्जा खर्च होना चाहिए।
तनाव को कैसे कहें अलविदा....
तनाव को कैसे कहें अलविदा....
 
तनाव जीवन का नाश करता है, इससे दूर ही रहें तो अच्छा है। तनाव दूर करने के लिए कुछ आसान उपाय हम आपको बता रहे हैं, आप इन्हें अपनी दिनचर्या में शामिल करें।
सिर्फ 5 आहार, ठंड में रखे सदाबहार
सिर्फ 5 आहार, ठंड में रखे सदाबहार
सर्द मौसम में व्यायाम करके अपने शरीर को गर्म व ऊर्जावान बनाए रखने के साथ ही अपने भोजन में ऐसी चीजों को शामिल करना भी जरूरी हो गया है जिनकी कम मात्रा लेने पर भी शरीर को भरपूर कैलोरी मिले। पेश है 5 ऐसे आहार जो आपको सर्दियों में तरोताजा और स्वस्थ बनाएंगे।
ठंड के मौसम में क्या करें, क्या न करें
ठंड के मौसम में क्या करें, क्या न करें
जिन लोगों को साइनस, एलर्जी, ब्रोंकाइटिस, अस्थमा जैसे रोग होते हैं, उन्हें सावधानीपूर्वक खाने-पीने में परहेज बरतना चाहिए। उन्हें कफवर्धक चीजों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। नीचे लिखी सावधानियों पर अमल कर आप सर्दियों की तकलीफों से खुद को बचा सकते हैं।
खुश रहने के लिए जरूरी है यह 8 बातें
खुश रहने के लिए जरूरी है यह 8 बातें

खुश रहना हर कोई चाहता है लेकिन अक्सर हम परेशान रहते हैं। चिंता और तनाव हर किसी की जिंदगी में आते है, जरूरी यह होता है कि हम उनसे कैसे निपटते हैं। आइए आज आपको खुश रहने के कुछ सरल टिप्स बताते हैं।

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स्माइल- सबसे अधिक जरूरी है आपका मुस्कुराना। परिस्थिति चाहे जैसी हो आपके चेहरे पर एक मुस्कान सजी रहेगी तो हर मुश्किल आसान लगने लगेगी।
प्रे रणा - जिस व्यक्ति का काम अच्छा लगे उससे प्रेरणा लें। अखबार के अलावा किताबें पढ़ने की आदत डालें।

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हर व्यक्ति में अच्छी और बुरी बातें होती है आप उसमें क्या देखते हैं और क्या सीखते हैं यह आप पर ही तो निर्भर करता है। हर व्यक्ति की अच्छी बातें सीखने और आत्मसात करने का प्रयास कीजिए।
रिलैक्स्ड रहें- दिन भर में पचासों ऐसे कारण सामने आते है जिनसे खीज होती है, स्वस्थ रहने के लिए बेहतर है कि यह खीज आपके साथ क्षण भर ही रहे। तुरंत हर चीज पर नियंत्रण पाने की कोशिश करें।



सकारात्मक लोगों के साथ रहें- आप के आस-पास के लोग सकारात्मक सोच वाले हों यह सबसे ज्यादा जरूरी है।

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नकारात्मक सोच वाले लोग अगर आसपास हो भी तो कोशिश करें कि उनकी सोच का आप पर असर ना पड़े।
दयालुता- इसकी शुरुआत भी आप अपने आप से करें। खुद के प्रति दयालु रहें आपकी सोच पॉजिटिव हो जाएगी। फिर हर किसी के प्रति उदार भाव रखें आपको भी अच्छा लगेगा।




विश्वास - जी हां, फरेब की इस दुनिया में विश्वास के साथ चलें। आपका विश्वास आपको दिशा देगा। ‍विश्वास करें और विश्वास जीतें यही खुश रहने का मूल मंत्र है। आत्मविश्वास से इसकी शुरुआत होती है। 
ध्यान बांटें- जो बात आपको ज्यादा परेशान कर रही है उससे अपना ध्यान हटा कर उन बातों की तरफ कीजिए जो आपको अच्छी लगती है।  
अक्सर हम दूसरों से बहुत अधिक उम्मीद रखने लगते हैं और जब वे हमारी उन उम्मीदों के विपरीत व्यवहार करते हैं तो हमें दुख पहुंचता है। अत: अपेक्षाओं को कम करें। जअच्छलगसोचें 
प्यार करें- हम सभी अपने जीवन में एक बार प्यार अवश्य करते हैं। स्वस्थ रहने के लिए वैज्ञानिकों ने सिद्ध किया है प्यार आपको ताकत देता है।
 सच्चे दिल से किसी को चाहे। अपने प्यार को विशाल बनाएं। अपने प्रेमी या प्रेमिका को हर वक्त खुशी देने के बारे में सोचें। आपको भी उतना ही प्यार मिलेगा। खुशी के लिए इससे बढ़कर और कोई दवा नहीं हो सकती।



 
एड्स : बचाव के लिए क्या करें-क्या न करें
एड्स : बचाव के लिए क्या करें-क्या न करें
संक्रमित व्यक्ति में एड्स के लक्षणों का विकास संक्रमण के 6 महीने से लेकर 10 साल तक में हो सकता है। लक्षण विकसित होने तक व्यक्ति सामान्यतः स्वस्थ दिखाई देता है पर उसके संपर्क में आने वालों को वह संक्रमित कर सकता है। 

एड्स के सामान्य लक्षण खांसी लगातार बनी रहना, चमड़ी का इंफेक्शन, हरपीज, ग्लैंड्स का बढ़ना, बार-बार दस्त लगना व ठीक न होना, गले-बगल की ग्रंथियों में सूजन आना, मुंह में खुजली होना, भूख खत्म हो जाना तथा रात में सोते समय पसीना आना आदि।




डॉक्टर लोग इसके लक्षणों को लेकर इसलिए भी भ्रम में रहते हैं, क्योंकि इस प्रकार के लक्षण टी.बी. व पेचिश, डायरिया, मलेरिया जैसी बीमारियों में भी पाए जाते हैं। जरा भी रिस्क न लेते हुए मरीज को तुरंत एचआईवी टेस्ट कराने की सलाह देना चाहिए।

एच.आई.वी.पॉजीटिव

एच.आई.वी. पॉजीटिव घोषित हो जाने का तात्पर्य है कि वह व्यक्ति एच.आई.वी. के विषाणु द्वारा संक्रमित हो गया है, परंतु उसमें एड्स के लक्षणों का विकास नहीं हुआ है।

संक्रमित व्यक्ति में एड्स के लक्षणों का विकास संक्रमण के 6 महीने से लेकर 10 साल तक में हो सकता है। लक्षण विकसित होने तक व्यक्ति सामान्यतः स्वस्थ दिखाई देता है पर उसके संपर्क में आने वालों को वह संक्रमित कर सकता है।



परीक्षण का तरीका

* एचआईवी एलिइजा एंटीबॉडी टेस्ट से संक्रमण को पकड़ा जा सकता है। मुख्य शहरों में यह उपलब्ध है।

* वेस्टर्न ब्लोर टेस्ट एड्स की शतप्रतिशत सही जानकारी देता है। शुरुआत के संक्रमण के लिए पी-24 कोर इंटीजेन व बच्चों में आईजीए एलिइजा ज्यादा महत्व रखता है। संक्रमण बीमारी में कब बदल सकता है, इसके सीडी-4 कोशिकाओं की संख्या का पता लगाया जाता है। सीडी-8 कोशिकाओं की अधिकता, पी-24 एंटीजेन टेस्ट, बीटा-टू आइक्रोग्लोन्यूलीन आदि परीक्षणों की मदद ली जाती है।

* एड्स के मरीज के इलाज में सीडी-4 सेल काउंट और आरएनए कॉपीज टेस्ट की जरूरत होती है। इस परीक्षणों से ही पता चलता है कि दवा कब शुरू करना है और अब यह किस अवस्था में है।

* हाइली एक्टिव एंटीरिट्रोवाइरल थेरेपी द्वारा भी एड्स का उपचार किया जाता है, लेकिन यह तरीका महंगा है, इसका खर्च लगभग 7 हजार रुपए प्रतिमाह आता है और इसे कई वर्षों तक लगातार देना होता है।

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एड्स की दवाएं

एड्स बीमारी हो जाने पर इससे छुटकारा पाने की दुनिया में अभी कोई दवा नहीं बनी है।

जो भी दवाएं बनी हैं, वे सिर्फ बीमारी की रफ्तार को कम करती हैं, खत्म नहीं करतीं। एचआईवी के लक्षण पाए जाने पर उनका उपचार हो सकता है, ज्यादा देरी होने पर वह भी संभव नहीं रहता। व्यक्ति की मौत के बाद ही इससे छुटकारा मिलता है।

एड्स का उपचार सभी के वश में नहीं होता, यह अत्यंत महंगा उपचार है। इसकी जांच के परीक्षण भी अत्यंत महंगे होते हैं, जो जनसाधारण के वश के बाहर होता है।

एड्स का निदान पूरी तरह संभव नहीं हो पाया है। हां ऐसी दवाएं जरूर हैं जो वायरस के बढ़ते प्रकोप की गति को धीमा कर सकें। एजेडटी, एजीकोथाइमीडीन, जाइडोव्यूजडीन, ड्राईडानोसीन स्टाव्यूडीन आदि जैसी दवाएँ बहुत महँगी हैं।

इसके अलावा न्यूमोसिस्टीस कारनाई, साइटोमेगालोवाइरस माइकोबैक्टीरियम, टोक्सोप्लाज्मा, फंगस आदि हेतु दवा उपलब्ध है। इम्यूनोमोडुलेटर प्रक्रिया भी उपयोग में लाई जा रही है।

यदि एजेडटी दवा का कोर्स एक वर्ष तक लें तो भारतीय रुपयों में एक से सवा लाख रुपए खर्च आएगा, एड्स के वैक्सीन की तो बात ही दूर है। एड्स का वैक्सीन अभी प्रयोग के दौर से गुजर रहा है और इसे बाजार में आने में कई वर्ष लगेंगे। यह वैक्सीन भी इतना सस्ता नहीं होगा कि सभी अफोर्ड कर सकें।

एड्स से सुरक्षा कैसे

देखा जाए तो एचआईवी से बचाव बहुत आसान है, जरूरत है इसे समझने की।

* अपनी पत्नी के प्रति निष्ठा रखें, असुरक्षित तथा अवैध यौन संबंधों व गुदा मैथुन से बचें। यदि आप बाहर सेक्स करते हैं तो इस काम में एक से अधिक साथी न बनाएं।

* आप यदि दुराचारी हैं यानी अपनी पत्नी के अलावा किसी और के साथ सेक्स में लीन रहते हैं, सुन्दर-सुन्दर सोसायटी गर्ल्स देखकर अपने पर काबू नहीं रख पाते हैं तो नॉनक्सीनल-9 युक्त कंडोम का इस्तेमाल करें, जो एड्स के वायरस को नाकाम कर देता है। ध्यान रखें यह फिर भी 10 प्रतिशत असुरक्षित है। कंडोम को गलत तरीके से प्रयोग करने से वह कट-फट जाता है और वायरस आपको जकड़ लेता है। कंडोम द्वारा सेक्स करते समय आड़े-तिरछे आसन लगाकर वहां जबरदस्त कुश्ती न लड़ें, वरना सुरक्षा की गारंटी नहीं है।

* किसी भी प्रकार के यौन रोग की आशंका होने पर अपनी संपूर्ण जांच कराएं, फिर पूरा इलाज कराएं।

* हमेशा डिस्पोजेबल सिरींज व सुइयों का इस्तेमाल करें, किसी भी सुई को एक बार वापरने के बाद दोबारा प्रयोग में न लाया जाए।

* यदि किसी को खून चढ़ाने की जरूरत पड़ जाए, तो खून की एचआईवी जांच सुनिश्चित कर लें, संतुष्ट होने के बाद ही खून किसी दूसरे के शरीर में जाने दें।
 ऐसा करने से एड्स नहीं होता

* एड्स मरीज से हाथ मिलाने से।

* एड्सग्रस्त व्यक्ति के साथ उठने-बैठने से।

* एड्स के मरीज को गले लगाने से।

* मच्छर व मक्खियों के द्वारा काट लिए जाने से।

 
सर्दियों में युवाओं के लिए डाइट चार्ट
सर्दियों में युवाओं के लिए डाइट चार्ट
 
हम जैसा भोजन करते हैं, उसका असर हमारे तन व मन दोनों पर होता है। मौसम के बदलते ही अपने शरीर को चुस्त-दुरुस्त बनाए रखने के लिए हमें अपने भोजन में कुछ फेरबदल करने होते हैं। हेल्थ कांशियस युवाओं के लिए यह मौसम चुनौतियों से भरा होता है। सर्द मौसम में व्यायाम कर अपने शरीर को ऊर्जावान बनाए रखना जरूरी है साथ ही ऐसा आहार जिनकी कम मात्रा लेने पर भी उनके शरीर को भरपूर कैलोरी मिले।
लोकप्रिय हो रही है सूर्य-किरण थेरेपी
लोकप्रिय हो रही है सूर्य-किरण थेरेपी
सूर्यतापित वस्तुओं के उचित भीतरी और बाहरी प्रयोग से मनुष्य के शरीर में रंगों का संतुलन कायम रखा जा सकता है और अनेक प्रकार के रोगों को सहज ही दूर किया जा सकता है। यही सूर्य किरण चिकित्सा है। सूर्य की किरणों में सर्वरोगनाशक अद्भुत शक्ति है, यह बात हमारे ऋषि-मनीषी हजारों साल पहले अच्छी तरह जानते थे.... 
वैज्ञानिकों की मान्यता है कि विविध रंगों का मानव के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य पर बड़ा प्रभाव पड़ता है और प्रत्येक रंग के अपने विशेष आरोग्यकारक गुण होते है। रंग असंतुलन अर्थात रंगों की कमी या अधिकता के कारण मनुष्य के शरीर में कई प्रकार के रोग उत्पन्न हो जाते हैं।



सामान्य रूप से देखने पर सूर्य का प्रकाश सफेद ही दिखाई देता है पर वास्तव में वह सात रंगों का मिश्रण होता है। कांच के त्रिपार्श्व से सूर्य की किरणों को गुजारने पर दूसरी ओर इन सात रंगों को स्पष्ट देखा जा सकता है।

 
एरोबिक्स : फन, म्यूजिक एंड हेल्थ
एरोबिक्स : फन, म्यूजिक एंड हेल्थ
संगीत की धुन पर महिलाओं व युवतियों द्वारा किए जाने वाली शारीरिक व्यायाम को हम 'एरोबिक्स' कहते हैं। शरीर में बढ़ रही चर्बी को कम करने के लिए यह एक कारगर उपाय है। इसलिए हर शहर में एरोबिक्स प्रेमियों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
डायबिटीज के लिए सरल देशी नुस्खे
डायबिटीज के लिए सरल देशी नुस्खे
डायबिटीज अब उम्र, देश व परिस्थिति की सीमाओं को लांघ चुका है। इसके मरीजों का तेजी से बढ़ता आंकड़ा दुनियाभर में चिंता का विषय बन चुका है। जानते हैं कुछ देशी नुस्खे मधुमेह रोगियों के लिए - 
डायबिटीज अब उम्र, देश व परिस्थिति की सीमाओं को लांघ चुका है। इसके मरीजों का तेजी से बढ़ता आंकड़ा दुनियाभर में चिंता का विषय बन चुका है। जानते हैं कुछ देशी नुस्खे मधुमेह रोगियों के लिए -

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नीबू: मधुमेह के मरीज को प्यास अधिक लगती है। अतः बार-बार प्यास लगने की अवस्था में नीबू निचोड़कर पीने से प्यास की अधिकता शांत होती है।

  खीरा: मधुमेह के मरीजों को भूख से थोड़ा कम तथा हल्का भोजन लेने की सलाह दी जाती है। ऐसे में बार-बार भूख महसूस होती है। इस स्थिति में खीरा खाकर भूख मिटाना चाहिए।
गाजर-पालक : इन रोगियों को गाजर-पालक का रस मिलाकर पीना चाहिए। इससे आंखों की कमजोरी दूर होती है।
शलजम : मधुमेह के रोगी को तरोई, लौकी, परवल, पालक, पपीता आदि का प्रयोग ज्यादा करना चाहिए। शलजम के प्रयोग से भी रक्त में स्थित शर्करा की मात्रा कम होने लगती है। अतः शलजम की सब्जी, पराठे, सलाद आदि चीजें स्वाद बदल-बदलकर ले सकते हैं।
जामुन : मधुमेह के उपचार में जामुन एक पारंपरिक औषधि है। जामुन को मधुमेह के रोगी का ही फल कहा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगी, क्योंकि इसकी गुठली, छाल, रस और गूदा सभी मधुमेह में बेहद फायदेमंद हैं। मौसम के अनुरूप जामुन का सेवन औषधि के रूप में खूब करना चाहिए।

जामुन की गुठली संभालकर एकत्रित कर लें। इसके बीजों जाम्बोलिन नामक तत्व पाया जाता है, जो स्टार्च को शर्करा में बदलने से रोकता है। गुठली का बारीक चूर्ण बनाकर रख लेना चाहिए। दिन में दो-तीन बार, तीन ग्राम की मात्रा में पानी के साथ सेवन करने से मूत्र में शुगर की मात्रा कम होती है।
करेले : प्राचीन काल से करेले को मधुमेह की औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसका कड़वा रस शुगर की मात्रा कम करता है। मधुमेह के रोगी को इसका रस रोज पीना चाहिए। इससे आश्चर्यजनक लाभ मिलता है। अभी-अभी नए शोधों के अनुसार उबले करेले का पानी, मधुमेह को शीघ्र स्थाई रूप से समाप्त करने की क्षमता रखता है।
मैथी : मधुमेह के उपचार के लिए मैथीदाने के प्रयोग का भी बहुत चर्चा है। दवा कंपनियां मैथी के पावडर को बाजार तक ले आई हैं। इससे पुराना मधुमेह भी ठीक हो जाता है। मैथीदानों का चूर्ण बनाकर रख लीजिए। नित्य प्रातः खाली पेट दो टी-स्पून चूर्ण पानी के साथ निगल लीजिए। कुछ दिनों में आप इसकी अद्भुत क्षमता देखकर चकित रह जाएंगे।

गेहूं के जवारे : गेहूं के पौधों में रोगनाशक गुण विद्यमान हैं। गेहूं के छोटे-छोटे पौधों का रस असाध्य बीमारियों को भी जड़ से मिटा डालता है। इसका रस मनुष्य के रक्त से चालीस फीसदी मेल खाता है। इसे ग्रीन ब्लड के नाम से पुकारा जाता है। जवारे का ताजा रस निकालकर आधा कप रोगी को तत्काल पिला दीजिए। रोज सुबह-शाम इसका सेवन आधा कप की मात्रा में करें।

अन्य उपचार : नियमित रूप से दो चम्मच नीम का रस, केले के पत्ते का रस चार चम्मच सुबह-शाम लेना चाहिए। आंवले का रस चार चम्मच, गुडमार की पत्ती का काढ़ा सुबह-शाम लेना भी मधुमेह नियंत्रण के लिए रामबाण है।

नोट: इस लेख में मधुमेह रोगियों के लिए कुछ देसी नुस्खे पेश किए गए हैं। इनमें से किसी को भी आजमाने से पूर्व अपने चिकित्सक से राय अवश्य लें।    
10 हेल्थ टिप्स, आपको रखें स्वस्थ-मस्त
10 हेल्थ टिप्स, आपको रखें स्वस्थ-मस्त
कहीं भी बाहर से घर आने के बाद, किसी बाहरी वस्तु को हाथ लगाने के बाद, खाना बनाने से पहले, खाने से पहले, खाने के बाद और बाथरूम का उपयोग करने के बाद हाथों को अच्छी तरह साबुन से धोएं। यदि आपके घर में कोई छोटा बच्चा है तब तो यह और भी जरूरी हो जाता है। उसे हाथ लगाने से पहले अपने हाथ अच्छे से जरूर धोएं।

बुनाई और हाथ से बने स्वेटर सिर्फ ठंड ही नहीं भगाते उनके साथ भावनाओं की गर्माहट भी होती है। साथ ही जाने-अनजाने में बुनाई कई शारीरिक व मानसिक समस्याओं को भी दूर भगा देती है।


आंवला और नींबू का रस

बाल झड़ने से परेशान हैं तो आजमाएं ये प्राकृतिक उपाय

आंवला और नींबू का रस

आंवले से बीज निकालकर इसका पेस्ट बना लें और पेस्ट को छनी से छानकर इसका जूस निकाल लें।

अब इसमें तीन चम्मच नींबू का रस मिलाएं और बालों की जड़ों तक लगाकर 30 मिनट तक छोड़ दें। इसके बाद बाल धो लें।

नियमित तौर पर इसे आजमाएं, बालों का झड़ना कम हो जाएगा।

कढ़ी पत्ता, मेथी दाना और हरे चने का पेस्ट


15 से 20 कढ़ी पत्ता लें, एक नींबू का छिलका लें, रीठा पाउडर, दो चम्मच मेथी दाना, दो चम्मच हरा तना पासकर पाउडर बना लें और एक बोतल में भर लें।

शैंपू के विकल्प के तौर पर इसका इस्तेमाल करने से आपको लाभ महसूस होगा।


बाल झड़ने से परेशान हैं तो आजमाएं ये प्राकृतिक उपाय

सिर की मसाज

सिर की मसाज


सिर की मसाज करने से भी बाल झड़ना कम हो सकता है। मसाज के दौरान स्काल्प में रक्त संचार अच्छी तरह होता है जिससे बालों का झड़ना कम हो जाता है।

महाभृंगराज तेल, आंवले का तेल या आरनिका ऑयल से सिर की मसाज मददगार हो सकती है।

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